पूर्वांचल

विद्वानों ने दमखम से रखा भारत के आर्य वीरों का संदेश,वाराणसी सहित अन्य प्रांतों से गुरुकुल में आईं छात्राओं के ओज विचारों से विद्वान भी हुए अचंभित

वाराणसी17दिसंबर : स्वामी दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती व आर्य समाज लल्लापुरा की 87वीं वार्षिक उत्सव के तीन दिवसीय कार्यक्रम के तहत दूसरे दिन शनिवार को तेलियाबाग स्थित श्री पटेल स्मारक, धर्मशाला में विविध कार्यक्रम आयोजित किए गएं ।

शनिवार की सुबह विधि विधान से वेदों के मंत्र के द्वारा यजमान सुधीर आर्य व उनकी पत्नी ने हवन यज्ञ किया । महमूरगंज स्थित पाणिनी कन्या महाविद्यालय की छात्राओं ने बतौर ब्राह्मण इस यज्ञ को संपन्न कराया । पहले सत्र के तहत मंचीय कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विद्वानों का उद्बोधन एवं भजन हुआ । अमेठी से आये डॉक्टर ज्वलंत कुमार शास्त्री जो कि आर्य जगत के वरिष्ठ विद्वान हैं एवं मुरादाबाद से आये श्री महावीर मुमुक्षु एवं मिर्जापुर से आये स्वामी राजेंद्र योगी ने अपने उद्बोधन में भारत को आर्य वीरों की भूमि बताया । वक्ताओं ने कहा कि अब हम सबको वेदों के प्रति जागरूक होना होगा, और वेदों के तरफ अग्रसर होना होगा । क्योंकि सनातनी संस्कार और वेद विहीन समाज किसी भी संस्कृति की दिशा तय नहीं कर सकता । मंचीय कार्यक्रम में भजन की सुरमधुर प्रस्तुति हुई जिसमें सुमेंद्र आर्य ने भजनों के माध्यम से लोगों को भाव विभोर कर दिया । वहीं हमीरपुर से आए रामसेवक आर्य ‘सूरदास’ जी ने भी एक से एक भजन सुना कर सभी को वेदों का संदेश दिया । उनके साथ तबले पर हिमांशु थें । दूसरे सत्र में महिला सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसका विषय था ‘मातृशक्ति राष्ट्र शक्ति प्राचीन विदुषियों का भारत’। महिला सम्मेलन की इस सत्र में वक्ता के रूप में पाणिनी कन्या महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. नंदिता शास्त्री, मातृ मंदिर कन्या गुरुकुल की प्रचार्या गायत्री आर्या व बीएचयू महिला महाविद्यालय की प्रचार्या डॉ. सुमन जैन ने अपने विचारों को प्रस्तुत करते हुए बताया कि जब तब हमसबको महर्षि के विचारों पर चितंन जरुरी है । और तभी इसी चितंन से भारत की संस्कृति का निर्माण कर सकते हैं । महिला वक्ताओं ने कहा कि पहले हमारी संस्कृति संरक्षित इसलिए थी कि हर तीन सौ किलोमीटर पर एक गुरुकुल हुआ करता था ।
बाल विवाह नाटक में छात्राओं ने किया भावुक ।
महिला सम्मेलन के दौरान वाराणसी सहित देश के अन्य प्रांतों से गुरुकुल में आयीं छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया । छात्राओं के ओज विचारों ने सभी को दंग कर दिया । इसके पश्चात छात्राओं ने बाल विवाह पर एक नाटक प्रस्तुत कर सभी को भावुक होने पर विवश कर दिया । छात्राओं ने संदेश दिया कि बाल विवाह की कुरितियों का दंश कितना भयावह होता था । सभागार में उपस्थ्ति सभी लोग इस नाटक को देश भावुक हो गयें ।  इस सत्र का संचालन डॉक्टर नंदिता शास्त्री जी ने किया ।
तीसरे सत्र में विद्वानों ने रखें विचार ।
शाम 5 से रात्रि 9:00 बजे तक आयोजित तीसरे सत्र के तहत भजन संध्या का आयोजन किया गया ।
इसके पश्चात महर्षि दयानंद का काशी शास्त्र से राष्ट्रीय संदेश पर विद्वानों की ओर से विचार रखे गएं जिसमें डॉक्टर ज्वलंत कुमार शास्त्री ने कहा कि कुरितियों को समाप्त कर समाज में नई दिशा देने के लिए स्वामी दयानंद जी के विचार आज भी प्रासंगिग हैं । कहा कि पश्चिमी संस्कृति के दस्तक ने प्राचीन संस्कृति पर प्रहार कर रहा है । जिसपर हम सभी को विचार किया जाना चाहिए । महावीर मुमुक्षु जी ने कहा कि आर्य संस्कृति अति प्राचीन संस्कृति है । स्वामी राजेंद्र योगी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि अपनी संस्कृति के प्रति ना सिर्फ न्याय करना होगा, अपितु आने वाली पीढ़ियों को भी इसके प्रति जागरुक करना होगा और यह सब हम सभी को करना होगा । नई पीढ़ी के भीतर जिस तरह से भारतीय संस्कृति के प्रति कुठारघाट का बीज बोया जा रहा है, वह आने वाले समय के लिए ज्वलंत मुद्दा है । इस सत्र का संचालन मंत्री अखिलेश आर्य व प्रधान सी.ए. विष्णु प्रसाद ने किया । इस दौरान सीए विष्णु प्रसाद, अखिलेश आर्य, सुधीर आर्य, जयप्रकाश आर्य सहित आर्य समाज लल्लापुरा व अन्य स्थानीय आर्य समाजों से जुड़े अन्य लोग शामिल रहें ।।

Prabandh Sampadak chandrashekhar Singh

Prabhand Sampadak Of Upbhokta ki Aawaj.

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